शनिवार, 31 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 28)

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 28


द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे |

स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्र्च यतयः संशितव्रताः  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 30 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 27)












अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 27


सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे |

आत्मसंयमयोगग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते  २७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 29 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 26)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 26


श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति |

शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 28 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 25)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 25


दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते |

ब्रह्मग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति  २५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 27 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 24)

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 24


ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् |

ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना  २४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 26 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 23)

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 23


गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः |

यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 25 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 22)

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 22


यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः |

समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते  २२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 24 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 21)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 21


निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः |

शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्  २१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 23 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 20)












अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 20


त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्य तृप्तो निराश्रयः |

कर्मण्यभिप्रवृत्तोSपि नैव किञ्चित्करोति सः  २० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 22 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 19)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 19


यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः |

ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहु: पण्डितं बुधाः  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 21 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 18)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 18

 

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः |

स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्  १८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 20 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 17)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 17


कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः |

अकर्मणश्र्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः  १७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 19 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 16)












अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 16


किं कर्म किमकर्मेति कवयोSप्यत्र मोहिताः |

तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेSश्रुभात्  १६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 18 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 15)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 15


एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षिभिः |

कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पुर्वै: पूर्वतरं कृतम्  १५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 17 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 14)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 14


न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा |

इति मां योSभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते  १४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 16 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 13)












अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 13


चातुवर्ण्यं मया सृष्टं गुण कर्मविभागशः |

तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्  १३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 15 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 12)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 12


काङ्न्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः |

क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा  १२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 14 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 11)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 11


ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् |

मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः  ११ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 13 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 10)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 10


वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः |

बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः  १० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 12 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 9)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 9


जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः |

त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोSर्जुन  ९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 11 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 8)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 8


परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् |

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे  ८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 10 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 7)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 7


यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्  ७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 9 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 6)











अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 6


अजोSपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्र्वरोSपि सन् |

प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया  ६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 8 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 5)












अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 5


श्रीभगवानुवाच

बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन |

तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 7 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 4)










अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 4


अर्जुन उवाच

अपरं भवतो जन्म परं विवस्वतः |

कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 6 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 3)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 3


स एवायं मया तेSद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः |

भक्तोSसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्  ३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 5 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 2)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 2


एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदु: |

स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 4 मई 2025

अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान (श्लोक 4 . 1)









अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान

श्लोक 4 . 1


श्री भगवानुवाच

इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् |

विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेSब्रवीत्  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 3 मई 2025

अध्याय 3 : कर्मयोग (श्लोक 3 . 43)









अध्याय 3 : कर्मयोग

श्लोक 3 . 43


एवं बुद्धे: परं बुद्ध्वा संस्ताभ्यात्मानमात्मना |

जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम्  ४३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 2 मई 2025

अध्याय 3 : कर्मयोग (श्लोक 3 . 42)









अध्याय 3 : कर्मयोग

श्लोक 3 . 42


इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः |

मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धे: परतस्तु सः  ४२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 1 मई 2025

अध्याय 3 : कर्मयोग (श्लोक 3 . 41)









अध्याय 3 : कर्मयोग

श्लोक 3 . 41


तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ |

पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम्  ४१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada