मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.51)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.51


अर्जुन उवाच |

दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन |

इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः  ५१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.50)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.50


सञ्जय उवाच |


इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः |

आश्र्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा  ५० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 19 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.49)


अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.49


मा ते व्यथा मा च विमूढ़भावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् |

व्यपेतभी: प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य  ४९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 18 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.48)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.48


न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानै- र्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रै: |

एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर  ४८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.47)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.47


श्रीभगवानुवाच |

मया प्रसन्नेन तवार्जुनेदं रूपं परं दर्शितमात्मयोगात् |

तेजोमयं विश्र्वमनन्तमाद्यं यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्  ४७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.46)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.46


किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त- मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव |

तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्र्वमूर्ते  ४६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 15 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.45)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.45


अदृष्टपूर्वं हृषितोSस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे |

तदेव मे दर्शय देव रूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास  ४५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.44)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.44


तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीड्यम् |

पितेव पुत्रस्य सखेव सख्यु: प्रियः प्रिययार्हसि देव सोढुम्  ४४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.43)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.43


पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्र्च गुरुर्गरीयान् |

न त्वत्समोSस्त्यभ्यधिकः कुतोSन्यो लोकत्रयेSप्यप्रतिमप्रभाव  ४३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 12 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.41 - 42)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.41 - 42


सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति |

अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि  ४१ 


यच्चावहासार्थमसत्कृतोSसि विहारशय्यासनभोजनेषु |

एकोSथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम्  ४२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada