शनिवार, 20 जून 2026

अध्याय 14 : प्रकृति के तीन गुण (श्लोक 14.2)









अध्याय 14 : प्रकृति के तीन गुण

श्लोक 14.2


इदं ज्ञानमुपाश्रित्य मम सार्धम्यमागताः |

सर्गेSपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 19 जून 2026

अध्याय 14 : प्रकृति के तीन गुण (श्लोक 14.1)











अध्याय 14 : प्रकृति के तीन गुण

श्लोक 14.1


श्रीभगवानुवाच |

परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् |

यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 18 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.35)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.35


क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुषा । 

भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम् ॥३५॥


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 17 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.34)


'







अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.34


यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः |

क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत  ३४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 15 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.33)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.33


यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते |

सर्वत्रावस्थितो देहे तथात्मा नोपलिप्यते ३३


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 14 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.32)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.32


अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः |

शरीरस्थोSपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते || ३२ |


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 11 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.31)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.31


यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति |

तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा  ३१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 10 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.30)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.30


प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः |

यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति  ३० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 9 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.29)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.29


समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमिश्र्वरम् |

न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम्  २९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 8 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.28)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.28


समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्र्वम् |

विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada