गुरुवार, 11 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.31)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.31


यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति |

तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा  ३१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 10 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.30)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.30


प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः |

यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति  ३० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 9 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.29)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.29


समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमिश्र्वरम् |

न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम्  २९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 8 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.28)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.28


समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्र्वम् |

विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 7 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.27)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.27


यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम् |

क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ  २७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada

शनिवार, 6 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.26)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.26


अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते |

तेSपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 5 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.25)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.25


ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना |

अन्ये सांख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे  २५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 4 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.24)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.24


य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणै: सह |

सर्वथा वर्तमानोSपि न स भूयोSभिजायते  २४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 3 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.23)








अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.23


उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्र्वरः |

परमात्मेति चाप्युक्तो देहेSस्मिन्पुरुषः परः  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 2 जून 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.22)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.22


पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् |

कारणं गुणसङ्गोSस्य सदसद्योनिजन्मसु  २२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada