बुधवार, 22 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.52)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.52


श्रीभगवानुवाच |

सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम |

देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः  ५२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.51)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.51


अर्जुन उवाच |

दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन |

इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः  ५१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.50)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.50


सञ्जय उवाच |


इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः |

आश्र्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा  ५० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 19 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.49)


अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.49


मा ते व्यथा मा च विमूढ़भावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् |

व्यपेतभी: प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य  ४९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 18 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.48)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.48


न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानै- र्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रै: |

एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर  ४८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.47)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.47


श्रीभगवानुवाच |

मया प्रसन्नेन तवार्जुनेदं रूपं परं दर्शितमात्मयोगात् |

तेजोमयं विश्र्वमनन्तमाद्यं यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्  ४७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.46)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.46


किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त- मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव |

तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्र्वमूर्ते  ४६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 15 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.45)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.45


अदृष्टपूर्वं हृषितोSस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे |

तदेव मे दर्शय देव रूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास  ४५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.44)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.44


तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीड्यम् |

पितेव पुत्रस्य सखेव सख्यु: प्रियः प्रिययार्हसि देव सोढुम्  ४४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.43)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.43


पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्र्च गुरुर्गरीयान् |

न त्वत्समोSस्त्यभ्यधिकः कुतोSन्यो लोकत्रयेSप्यप्रतिमप्रभाव  ४३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 12 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.41 - 42)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.41 - 42


सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति |

अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि  ४१ 


यच्चावहासार्थमसत्कृतोSसि विहारशय्यासनभोजनेषु |

एकोSथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम्  ४२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 11 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.40)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.40


नमः पुरस्तादथ पृष्ठस्ते नमोSस्तु ते सर्वत एव सर्व |

अनन्तवीर्यामीतविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोSसि सर्वः  ४० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.39)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.39


वायुर्यमोSग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्र्च |

नमो नमस्तेSस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्र्च भूयोSपि नमो नमस्ते  ३९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.37)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.37


कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन् गरीयसे ब्रह्मणोंSप्यादिकर्त्रे |

अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत्  ३७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.36)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.36


अर्जुन उवाच |

स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च |

रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्घाः  ३६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 6 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.35)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.35


सञ्जय उवाच |

एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीती |

नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य  ३५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 5 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.34)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.34


द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् |

मया हतांस्तवं जहि माव्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान्  ३४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 4 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.33)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.33


तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रुन्भुंक्ष्व राज्यं समृद्धम् |

मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भाव सव्यसाचिन्  ३३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.32)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.32


श्रीभगवानुवाच |

कालोSस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः |

ऋतेSपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येSवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः  ३२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.31)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.31


आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोSस्तु ते देववर प्रसीद |

विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्  ३१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 28 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.30)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.30


लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ता- ल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः |

तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो  ३० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 26 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .29)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .29


यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः |

तथैव नाशाय विशन्ति लोका-स्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः  २९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 25 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .28)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .28


यथा नदीनां बहवोSम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति |

तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 24 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .26 - 27)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .26 - 27


अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घै |

भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदियैरपि योधमुख्यै:  २६ 

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि |

केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरूत्तमाङ्गै:  २७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 19 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .25)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .25


दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि

दृष्ट्वैव कालानलसन्निभानि |

दिशो न जाने न लभे च शर्म

प्रसीद देवेश जगन्निवास  २५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 17 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .24)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .24


नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं

व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम् |

दृष्ट्वा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा

धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो  २४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 16 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .23)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .23


रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं

महाबाहो बहुबाहूरूपादम् |

बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं

दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम्  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 15 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .22)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .22


रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या

विश्र्वSश्र्विनौ मरुतश्र्चोष्मपाश्र्च |

गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा

वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्र्चैव सर्वे || २२ |


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 14 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .21)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .21


अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति

केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति |

स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः

स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः  २१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 13 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .20)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .20


द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि 

व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्र्च सर्वाः | 

दृष्ट्वाद्भुतं रूपमुग्रं तवेदं 

लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन्  २० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 12 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .19)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .19


अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य-

मनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम् |

पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं

स्वतेजसा विश्र्वमिदं तपन्तम्  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 11 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .18)







अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .18


त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं

त्वमस्य विश्र्वस्य परं निधानम् |

त्वमव्ययः शाश्र्वतधर्मगोप्ता

सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे  १८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 10 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .17)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .17


किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च

तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् |

पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ता-

द्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम्  १७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 29 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .16)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .16


अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं 

पश्यामि त्वां सर्वतोSनन्तरूपम् | 

नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं 

पश्यामि विश्र्वेश्र्वर विश्र्वरूप  १६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 28 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .15)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .15


अर्जुन उवाच

पश्यामि देवांस्तव देव देहे

सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् |

ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थ-

मृषींश्र्च सर्वानुरगांश्र्च दिव्यान्  १५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 27 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .14)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .14


ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः |

प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत  १४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 26 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .13)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .13


तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा |

अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा  १३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 25 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .12)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .12


दिवि सूर्यसहस्त्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता |

यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः  १२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 24 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 10 - 11)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 10 - 11


अनेकवक्त्रनयनमनेकाअद्भुतदर्शनम् |

अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम्  १० 

दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् |

सर्वाश्र्चर्यमयं देवमनन्तं विश्र्वतोमुखम्  ११ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 9)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 9


सञ्जय उवाच

एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्र्वरो हरिः |

दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्र्वरम् .


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 8)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 8


न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा |

दिव्यं ददामि ते चक्षु: पश्य मे योगमैश्र्वरम्  ८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 21 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 7)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 7


इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् |

मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि  ७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 20 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 6)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 6


पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्र्विनौ मरुतस्तथा |

बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्र्चर्याणि भारत  ६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 19 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 5)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 5


श्री भगवानुवाच

पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोSथ सहस्त्रशः |

नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 18 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 4)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 4


मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो |

योगेश्र्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम्  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 17 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 3)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 3


एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्र्वर |

दृष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्र्वरं पुरुषोत्तम  ३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 2)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 2


भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया |

त्वत्तः कमलपत्राक्ष महात्म्यमपि चाव्ययम्  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 15 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 1)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 1


अर्जुन उवाच


मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् |

यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोSयं विगतो मम  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 14 जनवरी 2026

अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य (श्लोक 10 . 42)









अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 42


अथवा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन |

विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत्  ४२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 13 जनवरी 2026

अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य (श्लोक 10 . 41)









अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 41


यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा |

तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंSशसम्भवम्  ४१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada