मंगलवार, 30 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 11)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 11


यदक्षरं वेदविदो वदन्ति

विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः |

यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति

तत्ते पदं सङ्ग्रहेण प्रवक्ष्ये  ११ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 29 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 10)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 10


प्रयाणकाले मनसाचलेन

भक्तया युक्तो योगबलेन चैव |

भ्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्य-

क्स तं परं पुरुषमुपैति दिव्यम्  १० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 28 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 9)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 9


कविं पुराणमनुशासितार-

मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः |

सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप-

मादित्यवर्णं तमसः परस्तात्  ९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 27 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति 9श्लोक 8 . 8)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 8


अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना | 

परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन्  ८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 7)












अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 7


तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च | 

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः  ७  


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 6)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 6


यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् | 

तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः  ६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 24 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 5)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 5


अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् |

यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 4)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 4


अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्र्चाधिदैवतम् | 

अधियज्ञोSहमेवात्र देहे देहभृतां वर  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 22 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 3)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 3


श्रीभगवानुवाच 

अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोSध्यात्ममुच्यते | 

भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः  ३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 21 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 2)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 2


अधियज्ञः कथं कोSत्र देहेSस्मिन्मधुसूदन |

प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोSसि नियतात्मभिः  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 20 सितंबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 1)









अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 1


अर्जुन उवाच

किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम |

अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 29)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 29


जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये |

ते ब्रह्म तद्विदु: कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्  २९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 18 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 28)






अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 28


येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् |

ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 17 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 27)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 27


इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत । सर्वभूतानि संमोहं सर्गे यान्ति परन्तप ॥२७॥


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 16 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 26)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 26


वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन |

भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्र्चन  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 15 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 25)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 25


नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः |

मूढोSयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्  २५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 14 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 24)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 24


अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः |

परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम्  २४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 13 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 23)

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 23


अन्तवत्तुफलंतेषांतद्भवत्यल्पमेधसाम् |

देवान्देवयजोमद्भक्तायान्तिमामपि  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 22)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 22


स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते |

लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हितान् || २२ |


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 11 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 21)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 21


यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति |

तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्  २१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 10 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 20)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 20


कामैस्तैस्तैर्ह्रतज्ञानाः प्रपद्यन्तेSन्यदेवताः |

तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया  २० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 19)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 19


बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते |

वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 8 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 18)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 18


उदाराः सर्व एवैते ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम् |

आस्थितः स हि युक्तात्मा मामेवानुत्तमां गतिम्  १८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 7 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 17)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 17


तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्तिर्विशिष्यते |

प्रियो हि ज्ञानिनोSत्यर्थमहं स च मम प्रियः  १७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 6 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 16)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 16


चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोSर्जुन |

आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ || १६ |


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 15)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 15


न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः |

माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः  १५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 4 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 14)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 14


दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया | 

मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते  १४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 3 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 13)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 13


त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत् |

मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम्  १३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 2 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 12)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 12


ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्र्च ये |

मत्त एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि  १२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 1 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 11)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 11


बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम् |

धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोSस्मि भरतर्षभ  ११ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada