सोमवार, 1 सितंबर 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 11)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 11


बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम् |

धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोSस्मि भरतर्षभ  ११ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

I am the strength of the strong, devoid of passion and desire. I am sex life which is not contrary to religious principles, O lord of the Bhāratas [Arjuna].


भावार्थ

मैं बलवानों का कामनाओं तथा इच्छा से रहित बल हूँ | हे भरतश्रेष्ठ (अर्जुन)! मैं वह काम हूँ, जो धर्म के विरुद्ध नहीं है |


तात्पर्य

बलवान पुरुष की शक्ति का उपयोग दुर्बलों की रक्षा के लिए होना चाहिए, व्यक्तिगत आक्रमण के लिए नहीं | इसी प्रकार धर्म-सम्मत मैथुन सन्तानोन्पति के लिए होना चाहिए, अन्य कार्यों के लिए नहीं | अतः माता-पिता का उत्तरदायित्व है कि वे अपनी सन्तान को कृष्णभावनाभावित बनाएँ |