गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.5)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.5


क्लेशोSधिकतरस्तेषामव्यक्ता सक्तचेतसाम् |

अव्यक्ता हि गतिर्दु:खं देहवद्भिरवाप्यते  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.3 , 4)












अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.3 , 4


ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते |

सर्वत्रगमचिन्त्यं च कूटस्थमचलं ध्रुवम्  ३ 


सन्नियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः |

ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.2)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.2


श्रीभगवानुवाच |

मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते |

श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.1)












अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.1


अर्जुन उवाच |

एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते |

ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 26 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.55)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.55


मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः |

निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव  ५५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 25 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.54)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.54


भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोSर्जुन |

ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप  ५४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.53)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.53


नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया |

शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा  ५३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 22 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.52)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.52


श्रीभगवानुवाच |

सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम |

देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः  ५२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.51)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.51


अर्जुन उवाच |

दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन |

इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः  ५१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.50)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.50


सञ्जय उवाच |


इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः |

आश्र्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा  ५० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 19 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.49)


अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.49


मा ते व्यथा मा च विमूढ़भावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् |

व्यपेतभी: प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य  ४९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 18 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.48)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.48


न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानै- र्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रै: |

एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर  ४८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.47)












अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.47


श्रीभगवानुवाच |

मया प्रसन्नेन तवार्जुनेदं रूपं परं दर्शितमात्मयोगात् |

तेजोमयं विश्र्वमनन्तमाद्यं यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्  ४७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.46)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.46


किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त- मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव |

तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्र्वमूर्ते  ४६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 15 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.45)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.45


अदृष्टपूर्वं हृषितोSस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे |

तदेव मे दर्शय देव रूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास  ४५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.44)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.44


तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीड्यम् |

पितेव पुत्रस्य सखेव सख्यु: प्रियः प्रिययार्हसि देव सोढुम्  ४४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.43)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.43


पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्र्च गुरुर्गरीयान् |

न त्वत्समोSस्त्यभ्यधिकः कुतोSन्यो लोकत्रयेSप्यप्रतिमप्रभाव  ४३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 12 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.41 - 42)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.41 - 42


सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति |

अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि  ४१ 


यच्चावहासार्थमसत्कृतोSसि विहारशय्यासनभोजनेषु |

एकोSथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम्  ४२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 11 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.40)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.40


नमः पुरस्तादथ पृष्ठस्ते नमोSस्तु ते सर्वत एव सर्व |

अनन्तवीर्यामीतविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोSसि सर्वः  ४० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.39)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.39


वायुर्यमोSग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्र्च |

नमो नमस्तेSस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्र्च भूयोSपि नमो नमस्ते  ३९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.37)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.37


कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन् गरीयसे ब्रह्मणोंSप्यादिकर्त्रे |

अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत्  ३७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.36)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.36


अर्जुन उवाच |

स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च |

रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्घाः  ३६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 6 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.35)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.35


सञ्जय उवाच |

एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीती |

नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य  ३५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 5 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.34)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.34


द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् |

मया हतांस्तवं जहि माव्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान्  ३४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 4 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.33)








अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.33


तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रुन्भुंक्ष्व राज्यं समृद्धम् |

मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भाव सव्यसाचिन्  ३३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.32)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.32


श्रीभगवानुवाच |

कालोSस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः |

ऋतेSपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येSवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः  ३२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11.31)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11.31


आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोSस्तु ते देववर प्रसीद |

विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्  ३१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada