शुक्रवार, 29 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.20)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.20


प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्धयनादी उभावपि |

विकारांश्र्च गुणांश्र्चैव विद्धि प्रकृतिसम्भवान्  २० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 28 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.19)





अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.19


इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः |

मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 27 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.18)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.18


ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते |

ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्  १८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 26 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.17)











अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.17


अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम् |

भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च  १७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 25 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.16)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.16


बहिरन्तश्र्च भूतानामचरं चरमेव च |

सुक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत  १६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 24 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.15)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.15


सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् |

असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च १५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 22 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.14)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.14


सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोSक्षिशिरोमुखम् |

सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति  १४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 21 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.13)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.13


ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्र्नुते |

अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते  १३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 20 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.8-12)




















अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.8-12


अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् |

आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः  ८ 


इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहङ्कार एव च |

जन्ममृत्युजराव्याधिदु:खदोषानुदर्शनम्  ९ 


असक्तिरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु |

नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु  १० 


मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी |

विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि  ११ 


अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् |

एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोSन्यथा  १२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 19 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.6-7)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.6-7


महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च |

इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः  ६ 


इच्छा द्वेषः सुखं दु:खं सङ्घातश्र्चेतना धृतिः |

एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम्  ७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada

सोमवार, 18 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.5)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.5


ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधै: पृथक् |

ब्रह्मसूत्रपदैश्र्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्र्चितै:  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 17 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.4)


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अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.4


तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्र्च यत् |

स च यो यत्प्रभावश्र्च तत्समासेन मे श्रृणु  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 16 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.3)









अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.3


क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत |

क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज्ज्ञानं मतं मम  ३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 15 मई 2026

अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना (श्लोक 13.1 - 2)












अध्याय 13 : प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

श्लोक 13.1 - 2


अर्जुन उवाच

प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च |

एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव १


श्रीभगवानुवाच 

इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते |

एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 14 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.20)









अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.20


ये तु धर्मामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते |

श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेSतीव मे प्रियाः  २० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 13 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.18 - 19)











अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.18 - 19


समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयो: |

शीतोष्णसुखदु:खेषु समः सङ्गविवर्जितः  १८ 


तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् |

अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 12 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.17)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.17


यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति |

श्रुभाश्रुभपरित्यागी भक्तिमानयः स मे प्रियः  १७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 11 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.16)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.16


अनपेक्षः श्रुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः |

सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः  १६ .


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 10 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.15)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.15


यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः |

हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः  १५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 8 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.13 -14)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.13 -14


अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च |

निर्ममो निरहङ्कारः समदु:खसुखः क्षमी  १३ 


संतुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्र्चयः |

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः  १४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 7 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.12)












अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.12


श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते । 

ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥१२॥


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 6 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.11)










अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.11


अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः । 

सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ॥११॥


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 5 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.10)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.10


अभ्यासेSप्यसमर्थोSसि मत्कर्मपरमो भव |

मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि  १० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 4 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.9)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.9


अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम् |

अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय  ९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 3 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.8)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.8


मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेश्य |

निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः  ८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 1 मई 2026

अध्याय 12 : भक्तियोग (श्लोक 12.6 - 7)








अध्याय 12 : भक्तियोग

श्लोक 12.6 - 7


ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्पराः |

अनन्ये नैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते  ६ 


तेषाम हं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात् |

भवामि न चिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्  ७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada