गुरुवार, 31 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 25)


अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 25


शनैः शनैरूपरमेद्बुद्धया धृतिगृहीतया |

आत्मसंस्थं मनः कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत्  २५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 30 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 24)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 24


स निश्र्चयेन योक्तव्यो योगोSनिर्विणचेतसा |

सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः |

मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः  २४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 29 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 20-23)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 20-23


यत्रोपरमते चित्तं निरुद्धं योग सेवया |

यत्र चैवत्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति  २० 


सुख मात्यन्तिकं यत्तद्बुद्धिग्राह्यमतीन्द्रियम् |

वेत्ति यत्र न चैवायं स्थितश्र्चलति तत्त्वतः  २१ 


यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः |

यास्मन्स्थितो न दु:खेन गुरुणापि विचाल्यते  २२ 


तं विद्याद्दु:खसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम्  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 28 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 19)








अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 19


यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता |

योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 27 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 18)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 18


यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते |

निस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा  १८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 26 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 17)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 17


युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु |

युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दु:खहा  १७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 16)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 16


नात्यश्र्नतस्तु योगोSस्ति न चैकान्तमनश्र्नतः |

न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन  १६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 24 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 15)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 15


युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः |

शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति  १५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 23 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 13-14)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 13-14


समं कायशिरोग्रीवं धार्यन्नचलं स्थिरः |

सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्र्चानवलोकयन्  १३ 


प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः |

मनः संयम्य मच्चितो युक्त आसीत मत्परः  १४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 22 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 11-12)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 11-12


श्रुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः |

नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्  ११ 


तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः |

उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविश्रुद्धये  १२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 21 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 10)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 10


योगी युञ्जीत सततमात्मनं रहसि स्थितः |

एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः  १० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 20 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 9)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 9


सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु |

साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते  ९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 19 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 8)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 8


ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः |

युक्त इत्युच्यते योगी समलोष्ट्राश्मकाञ्चनः  ८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 7)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 7


जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः |

शीतोष्णसुखदु:खेषु तथा मानापमानयो:  ७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 6)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 6


बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः |

अनात्मस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत्  ६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 16 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 5)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 5


उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् |

आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 15 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 4)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 4


यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते |

सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 14 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 3)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 3

आरूरूक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते |

योगारुढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते  ३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 13 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 2)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 2


यं सन्न्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव |

न ह्यसन्न्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्र्चन  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 12 जुलाई 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 1)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 1


श्रीभगवानुवाच

अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः |

स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 29)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 29


भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्र्वरम् |

सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति  २९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 10 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 27-28)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 27-28


स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्र्चक्षुश्र्चैवान्तरे भ्रुवो: |

प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ  २७ 


यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः |

विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 9 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 26)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 26


कामक्रोधविमुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् |

अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम्  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 8 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 25)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 25


लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः |

छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः  २५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 7 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 24)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 24


योSन्तःसुखोSन्तरारामस्तथान्तज्योर्तिरेव यः |

स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोSधिगच्छति  २४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 6 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 23)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 23


 शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् |

कामक्रोधद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 5 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 22)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 22


ये हि संस्पर्शजा भोगा दु:खयोनय एव ते |

आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः  २२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 4 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 21)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 21


बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् |

स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्र्नुते  २१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 3 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 20)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 20


न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् |

स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद्ब्रह्मणि स्थितः  २० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 2 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 19)

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 19


इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः |

निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः  १९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 1 जुलाई 2025

अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म (श्लोक 5 . 18)









अध्याय 5 : कर्मयोग - कृष्णभावनाभावित कर्म

श्लोक 5 . 18


विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि |

श्रुनि चैव श्र्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः  १८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada