अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 14
सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्र्च दृढव्रताः |
नमस्यन्तश्र्च मां भक्तया नित्ययुक्ता उपासते || १४
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
His Holiness A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada's goal of the Hare Krishna Movement is to disseminate Krishna consciousness globally. His mission is to restore humanity's relationship with Krishna, spread spiritual awakening, and encourage harmony & peace, to teach Bhagavad-gita and Srimad Bhagavatam, promote congregational singing, and construct Krishna Temples. He encouraged millions to pursue a deeper spiritual purpose with his prolific publications and international outreach.
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 14
सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्र्च दृढव्रताः |
नमस्यन्तश्र्च मां भक्तया नित्ययुक्ता उपासते || १४
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 13
महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः |
भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् १३
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 12
मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः |
राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः १२
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 11
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् |
परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्र्वरम् ११
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 10
मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम् |
हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते १०
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 9
न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय |
उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु ९
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 8
प्रकृतिं स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः |
भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशं प्रकृतेर्वशात् ८
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
श्लोक 9 . 7
सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् |
कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ७
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 6
यथाकाशस्थितो नित्यं वायु: सर्वत्रगो महान् |
तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय ६
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 5
न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्र्वरम् |
भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः ५
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 4
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमुर्तिना |
मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः ४
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 3
अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप |
अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ३
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 2
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम् |
प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम् २
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 9 : परम गुह्य ज्ञान
श्लोक 9 . 1
श्रीभगवानुवाच
इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यसूयवे |
ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेSश्रुभात् १
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 28
वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम् |
अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम् २८
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 27
नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्र्चन |
तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन २७
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 26
श्रुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्र्वते मते |
एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः २६
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 25
धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणायनम् |
तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते २५
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 24
अग्निज्र्योतिरः श्रुक्लः षण्मासा उत्तरायणम् |
तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः २४
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 23
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः |
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ २३
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 22
पुरुषः स परः पार्थ भक्तया लभ्यस्त्वनन्यया |
यस्यान्तःस्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम् २२
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 21
अव्यक्तोSक्षर इत्युक्तस्तमाहु: परमां गतिम् |
यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम २१
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 20
परस्तस्मात्तु भावोSन्योSव्यक्तोSव्यक्तात्सनातनः |
यः स सर्वेषु भूतेषु नश्यत्सु न विनश्यति २०
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 19
भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते ।
रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥१९॥
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 18
अव्यक्ताद्वयक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे |
रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके १८
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 17
सहस्त्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदु: |
रात्रिं युगसहस्त्रान्तां तेSहोरात्रविदो जनाः १७
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 16
आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोSर्जुन |
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते १६
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 15
मामुपेत्य पुनर्जन्म दु:खालयमशाश्र्वतम् |
नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः १५
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 14
अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः |
तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः १४
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 13
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥८- १३॥
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada
अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति
श्लोक 8 . 12
सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च |
मूध्न्र्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् १२
Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada