बुधवार, 15 अक्टूबर 2025

अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति (श्लोक 8 . 26)












अध्याय 8 : भगवत्प्राप्ति

श्लोक 8 . 26


श्रुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्र्वते मते |

एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

According to Vedic opinion, there are two ways of passing from this world – one in light and one in darkness. When one passes in light, he does not come back; but when one passes in darkness, he returns.


भावार्थ

वैदिक मतानुसार इस संसार से प्रयाण करने के दो मार्ग हैं – एक प्रकाश का तथा दूसरा अंधकार का | जब मनुष्य प्रकाश के मार्ग से जाता है तो वह वापस नहीं आता, किन्तु अंधकार के मार्ग से जाने वाला पुनः लौटकर आता है |


तात्पर्य

आचार्य बलदेव विद्याभूषण ने छान्दोग्य उपनिषद् से (५.१०.३-५) ऐसा ही विवरण उद्धृत किया है | जो अनादि काल से सकाम कर्मों तथा दार्शनिक चिन्तक रहे हैं वे निरन्तर आवगमन करते रहे हैं | वस्तुतः उन्हें परममोक्ष प्राप्त नहीं होता, क्योंकि वे कृष्ण की शरण में नहीं जाते |