रविवार, 31 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 10)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 10


बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम् |

बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्  १० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 30 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 9)












अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 9


पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्र्चास्मि विभावसौ |

जीवनं सर्वभूतेषु तपश्र्चास्मि तपस्विषु  ९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 8)










अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 8


रसोSहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसुर्ययो: |

प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु  ८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 7)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 7


मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय |

मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव  ७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 27 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 6)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 6


एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय |

अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा  ६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 26 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 5)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 5


अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम् |

जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत्  ५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 25 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 4)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 4


भूमिरापोSनलो वायु: खं मनो बुद्धिरेव च |

अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा  ४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 24 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 3)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 3


मनुष्याणां सहस्त्रेषु कश्र्चिद्यतति सिद्धये | 

यततामपि सिद्धानां कश्र्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः  ३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 23 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 2)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 2


ज्ञानं तेSहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः | 

यज्ज्ञात्वा नेह भूयोSन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते  २ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 1)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 1


श्रीभगवानुवाच

मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः |

असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु  १ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 21 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 47)











अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 47


योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना |

श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः  ४७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 20 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 46)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 46


तपस्विभ्योSधिको योगी ज्ञानिभ्योSपि मतोSधिकः |

कर्मिभ्यश्र्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन  ४६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 19 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 45)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 45


प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संश्रुद्धकिल्बिषः |

अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम्  ४५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 18 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 44)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 44


पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोSपि सः |

जिज्ञासुरपि योगस्य शब्दब्रह्मातिवर्तते  ४४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 17 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 43)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 43


तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् |

यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन  ४३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 16 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 42)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 42


अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् |

एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्  ४२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 41)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 41


प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्र्वती: समाः |

श्रुचीनां श्रीमतां ग्रेहे योगभ्रष्टोSभिजायते  ४१ 

Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 14 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 40)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 40


श्रीभगवानुवाच

पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते |

न हि कल्याणकृत्कश्र्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति  ४० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 13 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 39)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 39


एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः |

त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते  ३९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 12 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 38)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 38


कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति |

अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि  ३८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 11 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 37)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 37


अर्जुन उवाच

अयतिः श्रद्धयोपेतो योगच्चलितमानसः |

अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां कृष्ण गच्छति  ३७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 10 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 36)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 36


असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः |

वश्यात्मना तु यतता शक्योSवाप्तुमुपायतः  ३६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 9 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 35)








अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 35


श्रीभगवानुवाच

असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् |

अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते  ३५ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 34)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 34


चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् |

तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्  ३४ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

गुरुवार, 7 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 33)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 33


अर्जुन उवाच

योSयं योगस्त्वया प्रोक्तः साम्येन मधुसूदन |

एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम्  ३३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

बुधवार, 6 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 32)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 32


आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योSर्जुन |

सुखं वा यदि वा दु:खं स योगी परमो मतः  ३२ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

मंगलवार, 5 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 31)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 31


सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः |

सर्वथा वर्तमानोSपि स योगी मयि वर्तते  ३१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

सोमवार, 4 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 30)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 30


यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति |

तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति  ३० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

रविवार, 3 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 29)








अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 29


सर्वभूतस्थमात्मनं सर्वभूतानि चात्मनि |

ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः  २९ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शनिवार, 2 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 27)









अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 27


प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् |

उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम्  २७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

अध्याय 6 : ध्यानयोग (श्लोक 6 . 26)












अध्याय 6 : ध्यानयोग

श्लोक 6 . 26


यतो यतो निश्र्चलति मनश्र्चञ्चलमस्थिरम् |

ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada