रविवार, 31 अगस्त 2025

अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान (श्लोक 7 . 10)









अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान

श्लोक 7 . 10


बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम् |

बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्  १० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

O son of Pṛthā, know that I am the original seed of all existences, the intelligence of the intelligent, and the prowess of all powerful men.


भावार्थ

हे पृथापुत्र! यह जान लो कि मैं ही समस्त जीवों का आदि बीज हूँ, बुद्धिमानों की बुद्धि तथा समस्त तेजस्वी पुरुषों का तेज हूँ |


तात्पर्य

कृष्ण समस्त पदार्थों के बीज हैं | कई प्रकार के चार तथा अचर जीव हैं | पक्षी, पशु, मनुष्य तथा अन्य सजीव प्राणी चर हैं, पेड़ पौधे अचर हैं – वे चल नहीं सकते, केवल खड़े रहते हैं | प्रत्येक जीव चौरासी लाख योनियों के अन्तर्गत है, जिनमे से कुछ चार हैं और कुछ अचर | किन्तु इस सबके जीवन के बीजस्वरूप श्रीकृष्ण हैं | जैसा कि वैदिक साहित्य में कहा गया है ब्रह्म या परमसत्य वह है जिससे प्रत्येक वस्तु उद्भुत है | कृष्ण परब्रह्म या परमात्मा हैं | ब्रह्म तो निर्विशेष है, किन्तु परब्रह्म साकार है | निर्विशेष ब्रह्म साकार रूप में आधारित है – यह भगवद्गीता में कहा गया है | अतः आदि रूप में कृष्ण समस्त वस्तुओं के उद्गम हैं | वे मूल हैं | जिस प्रकार मूल सारे वृक्ष का पालन करता है उसी प्रकार कृष्ण मूल होने के करण इस जगत् के समस्त प्राणियों का पालन करते हैं | इसकी पुष्टि वैदिक साहित्य में (कठोपनिषद् २.२.१३) हुई है –


नित्यो नित्यानां चेतनश्र्चेतनानाम्

एको बहूनां यो विदधाति कमान्


वे समस्त नित्यों के नित्य हैं | वे समस्त जीवों के परं जीव हैं और वे ही समस्त जीवों का पालन करने वाले हैं | मनुष्य बुद्धि के बिना कुछ भी नहीं कर सकता और कृष्ण भी कहते हैं कि मैं समस्त बुद्धि का मूल हूँ | जब तक मनुष्य बुद्धिमान नहीं होता, वह भगवान् कृष्ण को नहीं समझ सकता |