गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य (श्लोक 10 . 23)









अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 23


रुद्राणां शङ्करश्र्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् |

वसूनां पावकश्र्चास्मि मेरू: शिखरिणामहम्  २३ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

Of all the Rudras I am Lord Śiva, of the Yakṣas and Rākṣasas I am the Lord of wealth [Kuvera], of the Vasus I am fire [Agni], and of mountains I am Meru.


भावार्थ

मैं समस्त रुद्रों में शिव हूँ, यक्षों तथा राक्षसों में सम्पत्ति का देवता (कुबेर) हूँ, वसुओं में अग्नि हूँ और समस्त पर्वतों में मेरु हूँ |


तात्पर्य

ग्यारह रुद्रों में शंकर या शिव प्रमुख हैं | वे भगवान् के अवतार हैं, जिन पर ब्रह्माण्ड के तमोगुण का भार है | यक्षों तथा राक्षसों के नायक कुबेर हैं जो देवताओं के कोषाध्यक्ष तथा भगवान् के प्रतिनिधि हैं | मेरु पर्वत अपनी समृद्ध सम्पदा के लिए विख्यात है