सोमवार, 29 दिसंबर 2025

अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य (श्लोक 10 . 26)









अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 26


अश्र्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः |

गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः  २६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

Of all trees I am the banyan tree, and of the sages among the demigods I am Nārada. Of the Gandharvas I am Citraratha, and among perfected beings I am the sage Kapila.


भावार्थ

मैं समस्त वृक्षों में अश्र्वत्थ हूँ और देवर्षियों में नारद हूँ | मैं गन्धर्वों में चित्ररथ हूँ और सिद्ध पुरुषों में कपिल मुनि हूँ |


तात्पर्य

अश्र्वत्थ वृक्ष सबसे ऊँचा तथा सुन्दर वृक्ष है, जिसे भारत में लोग नित्यप्रति नियमपूर्वक पूजते हैं | देवताओं में नारद विश्र्वभर में सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं और पूजित होते हैं | इस प्रकार वे भक्त के रूप में कृष्ण के स्वरूप हैं | गन्धर्वलोक ऐसे निवासियों से पूर्ण है, जो बहुत अच्छा गाते हैं, जिनमें से चित्ररथ सर्वश्रेष्ठ गायक है | सिद्ध पुरुषों में से देवहुति के पुत्र कपिल मुनि कृष्ण के प्रतिनिधि हैं | वे कृष्ण के अवतार माने जाते हैं | इसका दर्शन भागवत में उल्लिखित है | बाद में भी एक अन्य कपिल प्रसिद्द हुए, किन्तु वे नास्तिक थे, अतः इन दोनों में महान अन्तर है |