सोमवार, 6 जनवरी 2025

अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण (श्लोक 1 . 43)

अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण

श्लोक 1 . 43


उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन |

नरके नियतं वासो भवतीत्यनुश्रुश्रुम  ४३ 

 

Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

O Kṛṣṇa, maintainer of the people, I have heard by disciplic succession that those whose family traditions are destroyed dwell always in hell.


भावार्थ

 हे प्रजापालक कृष्ण! मैनें गुरु-परम्परा से सुना है कि जो लोग कुल-धर्म का विनाश करते हैं, वे सदैव नरक में वास करते हैं |

 

 तात्पर्य

 अर्जुन अपने तर्कों को अपने निजी अनुभव पर न आधारित करके आचार्यों से जो सुन रखा है उस पर आधारित करता है | वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने की यही विधि है | जिस व्यक्ति ने पहले से ज्ञान प्राप्त कर रखा है उस व्यक्ति की सहायता के बिना कोई भी वास्तविक ज्ञान तक नहीं पहुँच सकता | वर्णाश्रम-धर्म की एक पद्धति के अनुसार मृत्यु के पूर्व मनुष्य को पापकर्मों के लिए प्रायश्चित्त करना होता है | जो पापात्मा है उसे इस विधि का अवश्य उपयोग करना चाहिए | ऐसा किये बिना मनुष्य निश्चित रूप से नरक भेजा जायेगा जहाँ उसे अपने पापकर्मों के लिए कष्टमय जीवन बिताना होगा |