गुरुवार, 9 जनवरी 2025

अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण (श्लोक 1 . 46)

अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण

श्लोक 1 . 46


सञ्जय उवाच

एवमुक्तवार्जुनः संख्ये रथोपस्थ उपाविशत् |

विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः  ४६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

Sañjaya said: Arjuna, having thus spoken on the battlefield, cast aside his bow and arrows and sat down on the chariot, his mind overwhelmed with grief.


भावार्थ

संजय ने कहा – युद्धभूमि में इस प्रकार कह कर अर्जुन ने अपना धनुष तथा बाण एक ओर रख दिया और शोकसंतप्त चित्त से रथ के आसन पर बैठ गया |

 

 तात्पर्य 

अपने शत्रु की स्थिति का अवलोकन करते समय अर्जुन रथ पर खड़ा हो गया था, किन्तु वह शोक से इतना संतप्त हो उठा कि अपना धनुष-बाण एक ओर रख कर रथ के आसन पर पुनः बैठ गया | ऐसा दयालु तथा कोमलहृदय व्यक्ति, जो भगवान् की सेवा में रत हो, आत्मज्ञान प्राप्त करने योग्य है |