शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

अध्याय 2 : गीता का सार (श्लोक 2 . 37)












अध्याय 2 : गीता का सार

श्लोक 2 . 37


हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् |

तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्र्चयः  ३७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

O son of Kuntī, either you will be killed on the battlefield and attain the heavenly planets, or you will conquer and enjoy the earthly kingdom. Therefore, get up with determination and fight.


भावार्थ

हे कुन्तीपुत्र! तुम यदि युद्ध में मारे जाओगे तो स्वर्ग प्राप्त करोगे या यदि तुम जीत जाओगे तो पृथ्वी के साम्राज्य का भोग करोगे | अतः दृढ़ संकल्प करके खड़े होओ और युद्ध करो |


तात्पर्य

यद्यपि अर्जुन के पक्ष में विजय निश्चित न थी फिर भी उसे युद्ध करना था, क्योंकि यदि वह युद्ध में मारा भी गया तो वह स्वर्गलोक को जायेगा |