मंगलवार, 24 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .26 - 27)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .26 - 27


अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घै |

भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदियैरपि योधमुख्यै:  २६ 

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि |

केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरूत्तमाङ्गै:  २७ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

All the sons of Dhṛtarāṣṭra, along with their allied kings, and Bhīṣma, Droṇa, Karṇa – and our chief soldiers also – are rushing into Your fearful mouths. And some I see trapped with heads smashed between Your teeth.


भावार्थ

धृतराष्ट्र के सारे पुत्र अपने समस्त सहायकराओं सहित तथा भीष्म, द्रोण, कर्ण एवं हमारे प्रमुख योद्धा भी आपके विकराल मुखमें प्रवेश कर रहे हैं | उनमें से कुछ के शिरों को तो मैं आपके दाँतों के बीचचूर्णित हुआ देख रहा हूँ |


तात्पर्य

एक पिछले श्लोक में भगवान् ने अर्जुन को वचन दिया था कि यदि वह कुछ देखने इच्छुक हो तो वे उसे दिखा सकते हैं |अब अर्जुन देख रहा है कि विपक्ष के नेता (भीष्म, द्रोण, कर्ण तथा धृतराष्ट्र के सारे पुत्र) तथा उनके सैनिक और अर्जुन के भी सैनिक विनष्ट हो रहे हैं | यह इसका संकेत है कि कुरुक्षेत्र में एकत्र समस्त व्यक्तियों की मृत्यु के बाद अर्जुनविजयी होगा | यहाँ यह भी उल्लेख है कि भीष्म भी, जिन्हें अजेय माना जाता है,ध्वस्त हो जायेंगे | वही गति कर्ण की होनी है | न केवल विपक्ष भीष्म जैसे महानयोद्धा विनष्ट हो जाएँगे, अपितु अर्जुन के पक्ष वाले कुछ महान योद्धा भी नष्टहोंगे |