बुधवार, 25 मार्च 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 .28)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 .28


यथा नदीनां बहवोSम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति |

तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति  २८ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

As the many waves of the rivers flow into the ocean, so do all these great warriors enter blazing into Your mouths.


भावार्थ

जिस प्रकार नदियों की अनेक तरंगें समुद्र में प्रवेश करती हैं, उसीप्रकार ये समस्त महान योद्धा भी आपके प्रज्जवलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं |