शनिवार, 3 जनवरी 2026

अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य (श्लोक 10 . 31)












अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 31


पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् |

झषाणां मकरश्र्चास्मि स्त्रोतसामस्मि जाह्नवी  ३१ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

Of purifiers I am the wind, of the wielders of weapons I am Rāma, of fishes I am the shark, and of flowing rivers I am the Ganges.


भावार्थ

समस्त पवित्र करने वालों में मैं वायु हूँ, शस्त्रधारियों में राम, मछलियों में मगर तथा नदियों में गंगा हूँ |


तात्पर्य

समस्त जलचरों में मगर सबसे बड़ा और मनुष्य के लिए सबसे घातक होता है | अतः मगर कृष्ण का प्रतिनिधित्व करता है |और नदियों में , भारत में सबसे बड़ी माँ गंगा है | रामायण के भगवान् राम जो श्रीकृष्ण के अवतार हैं, योद्धाओं में सबसे अधिक शक्तिशाली हैं |