सोमवार, 12 जनवरी 2026

अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य (श्लोक 10 . 40)









अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 40


नान्तोSस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप |

एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया  ४० 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

O mighty conqueror of enemies, there is no end to My divine manifestations. What I have spoken to you is but a mere indication of My infinite opulences.


भावार्थ

हे परन्तप! मेरी दैवी विभूतियों का अन्त नहीं है | मैंने तुमसे जो कुछ कहा, वह तो मेरी अनन्त विभूतियों का संकेत मात्र है |


तात्पर्य

जैसा कि वैदिक साहित्य में कहा गया है यद्यपि परमेश्र्वर की शक्तियाँ तथा विभूतियाँ अनेक प्रकार से जानी जाती हैं, किन्तु इन विभूतियों का कोई अन्त नहीं है, अतएव समस्त विभूतियों तथा शक्तियों का वर्णन कर पाना सम्भव नहीं है | अर्जुन की जिज्ञासा को शान्त करने के लिए केवल थोड़े से उदाहरण प्रस्तुत किये गये हैं |