मंगलवार, 20 जनवरी 2026

अध्याय 11 : विराट रूप (श्लोक 11 . 6)









अध्याय 11 : विराट रूप

श्लोक 11 . 6


पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्र्विनौ मरुतस्तथा |

बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्र्चर्याणि भारत  ६ 


Translation by His Divine Grace Srila A C Bhaktivedanta Swami Prabhupada 

O best of the Bhāratas, see here the different manifestations of Ādityas, Vasus, Rudras, Aśvinī-kumāras and all the other demigods. Behold the many wonderful things which no one has ever seen or heard of before.


भावार्थ

हे भारत! लो, तुम आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्र्विनीकुमारों तथा अन्य देवताओं के विभिन्न रूपों को यहाँ देखो । तुम ऐसे अनेक आश्चर्यमय रूपों को देखो, जिन्हें पहले किसी ने न तो कभी देखा है, न सुना है ।

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तात्पर्य

यद्यपि अर्जुन कृष्ण का अन्तरंग सखा तथा अत्यन्त विद्वान था, तो भी वह उनके विषय सबकुछ नहीं जानता था । यहाँ पर यह कहा गया है कि इन समस्त रूपों को न तो मनुष्य पूर्व देखा है, न सुना है । अब कृष्ण इन आश्चर्यमय रूपों को प्रकट कर रहे हैं ।